एक
था गधा उर्फ अलादाद खाँ (शरद
जोशी)
एक था गधा उर्फ अलादाद खाँ, शरद जोशी द्वारा लिखा व्यंग्य नाटक है । शरद जोशी जी ने अपने नाटक में
स्पष्ट करने की कोशिश किया है - किस प्रकार राजनीतिक पक्ष
अपने स्वार्थ के लिए सामान्य जनता को मूर्ख बनाए रखते हैं और इसी राजनीतिक परिवेश
के कारण देश में घट रही मूल्यहन्ता त्रासदी को दर्शाना ही इस नाटक का मुख्य
उद्देश्य है ।
एक तरह से शरद जोशी जी ने यह नाटक
उस समय लिखा था,
जब देश में आपातकाल के कारण जनसाधारण शोषित था । यह उसी सच्चाई का
दर्पण मान सकते हैं ।
नाटक में पात्रों की संख्या कोई है
। लेकिन मुख्य पात्र नवाब व कोतवाल जो राजनीतिक व प्रशासनिक शक्ति के प्रतीक है और
अलादाद खाँ जो जनसाधारण का प्रतीक हैं जो दुखी है, परेशान है
जिन्हें कोई नहीं सुनता ।
SUMMARY:
There
lived a washer man named Juggan, in a small township. He had a
companion, close enough to his heart, his donkey named Alladad Khan.
Alas! The donkey hits the bucket all of a sudden. Juggan wails in pain, howling
day in day out, hovering healther and thither for his dead Alladad khan. There
used to be a routine gathering of some young boys the colony at Devilal
Panwala’s shop. The Kotwal of the town passes by the shop and bump
into the boys.
He
gives a good thrashing for their gathering as such and calls it unsocial. The
boys forward a plausible excuse for such, as they inform him about the sudden
demise of a respected figure of the society, whom they pretend to be Alladad
Khan. They are supposed to be gathered here for the same. Kotwal on the other
hand, getting late for the Nawab’s court finds a great excuse. He put
forward the same excuse to Nawab Sahab, when questioned for his late arrival.
Nawab has a soft corner for ‘wide acknowledgement’ at no price.
Thus, in order to cash the blood of late
Alladad Khan, Nawab proclaim three days official leave to all and his
self-visit to the Janaza of Alladad Khan now, there goes a tacit preparation
for the Nawab suspect something fishy and discover the truth that Alladad Khan
is no one but a donkey. This ignites a great chaos and pandemonium in the
presidency. All are afraid of letting the whole preparation go vein and no one
wishes to let this mania go down. And lo! They discover a man named Alladad
Khan in the same township, who seems to be a solution to keep the ambience
fervent. He was then planned to be killed and the Nawab shoulders the
responsibility to do so. In this way, the Nawab get himself enlisted in the
royal history of his presidency, as the most generous ruler, history has ever
seen.
राजनीतिक पक्ष द्वारा अमन व शान्ति
की बात की जाती है । लेकिन अन्दर ही अन्दर आम जनता दुःखी है । जैसे - अलादाद खाँ । राजनीतिक व प्रशासन के प्रतीक नवाब व कोतवाल अपने स्वार्थ के
कारण अलादाद खाँ को मरने पर मजबूर करते हैं । दुखी व परेशान अलादाद खाँ अपना पक्ष
रखते हुए कहता हैं -
मैं अलादाद खाँ हूँ । मगर मेरी कोई गलती नहीं । ... मैं हमेशा बाँए से चलता हूँ । क्यू मैं खड़ा रहता हूँ । सिपाही के हुकम को
कानून मानता हूँ । टैक्स चुकाता हूँ । रात के बाद घर से नहीं निकलता,... पड़ोसियों की मौका-मुसीबत में मदद करता हूँ ।...
मैंने कभी कोई गलती नहीं
की ।
लेकिन अलादाद खाँ का दुःख नवाब
सुनने को तैयार नहीं,
नवाब केवल अपना भविष्य व स्वार्थ देखते हुए, जवाब
देते हैं इतिहास नहीं पढ़ा । लगता है तुमने सिर्फ नागरिकशास्त्र पढ़ा है, इतिहास नहीं पढ़ा । अब वक्त नहीं रहा क्योंकि तुम खुद इतिहास होने जा रहे
हो, अलादाद, इतिहास । यह तुम हो और तुम
न होते तो कोई दूसरा होता या न होता, मगर जो भी हो हम एक
जनाजा देखने के लिए बेचैन खड़ी भीड़ को ज्यादा देर निराश नहीं करेंगे ।
इस प्रकार नवाब अपने स्वार्थ के लिए, निर्दोष अलादाद खाँ को मार देते हैं नवाब उपदेश देते है हर नागरिक को
त्याग और कुर्बानी को तैयार हो जाना चाहिए । अतः राजनीतिक पक्ष जो भी उपदेश्य देते
हैं, कहते कुछ और करते कुछ ओर हैं । केवल अपना ही सोचते हैं
।
क. प्रश्न-उत्तर
१) जुग्गन क्या
काम करता था ?
उत्तर - धोबी २) जुग्गन ने किस का नाम अलादाद खाँ रखा था ?
उत्तर - गधे का नाम
३) पानवाले का
क्या नाम था ?
उत्तर - देवीलाल ४) नवाब किस की लाश को कन्धा देना चाहते है ?
उत्तर - अलादाद खाँ
५) अलादाद खाँ
का क्या कुसूर था ?
उत्तर - क्योंकि मरे हुए गधे का नाम अलादाद खाँ था ।६) सरकारी
तौर पर किस की मरने की पुष्टि हो चुकी थी । उत्तर - अलादाद
खाँ
कक. निबन्धात्मक प्रश्न
१) एक था गधा
उर्फ अलादाद खाँ में व्यक्त व्यंग्य पर प्रकाश डालिए । २) एक
था गधा उर्फ अलादाद खाँ नाटक के कथावस्तु पर प्रकाश डालिए । ३) नाटक के विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
४)नवाब व
कोतवाल दोनों राजनीतिक व प्रशासनिक प्रतीक है । नाटक के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
५)विश्व के
इतिहास में आम आदमी की भूमिका न के बार है । इस सत्य को नाटक के आधार पर स्पष्ट
कीजिए ।
डा. आर. नागेश
हिन्दी विभाग
संत आग्नेस कालेज (स्वायत्त)
मंगलूर - 575002 Mobile: 9980313384
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